मैं और मेरा भाँजा - १

पिछले कुछ महीनों से मेरा भांजा और मेरी बहन दिल्ली में मेरे साथ रह रहे हैं. ये समय मेरे लिए बेहद सुखद है. स्कूल की पढ़ाई के बाद जब कॉलेज में दाखिला लिया तब से अब तक लगभग अकेले ही रहा हूँ, तो ऐसे में अचानक परिवार का साथ आ जाना सुखद लगता ही है. अकेले रहने में एक सबसे बड़ी कमी जो मुझे महसूस होती थी वो था की वीकेंड हमेशा यूँहीं बर्बाद हो जाता था. मुझे क्राउड बहुत ज्यादा पसंद नहीं इसलिए वीकेंड को घर पर ही रहता था. वीकेंड पर हर कॉफ़ी शॉप और मॉल खचाखच भरे होते हैं, तो ऐसे में मैं आमतौर पर वीकडे ही आउटिंग के लिए पसंद करता था. लेकिन अब जब से बहन और भांजा आ गए हैं, आउटिंग वीकेंड पर होने लगी है .

पहले मेरे लिए तो इतवार भी कोई मायने नहीं रखता था. मेरा लगभग सारा काम घर से ही (फ्रीलांस के जरिये) होता है, तो ऐसे में इतवार बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं था मेरे लिए. लेकिन जब से बहन और भांजा रहने आये  हैं मेरे साथ, इतवार ख़ास हो गया. छुट्टी का एक दिन..जैसे बचपन में होता था कि इतवार को हम देर से सो सकते थे, और घूमते थे. वैसे ही अब भी होने लगा है. मेरे भांजे का स्कूल बंद रहता है इतवार को और हम कहीं न कहीं घुमने निकल ही जाते हैं. हाँ, ये अलग बात है कि मेरे भांजे को घुमने के मामले में मेरे शौक को झेलना पड़ता है. बच्चों के पार्क में न ले जाकर उसे मैं कभी पुराना किला घुमाने के लिए ले जाता हूँ तो कभी क़ुतुब, कभी दिल्ली का दिल कनौट प्लेस और कभी पुरानी दिल्ली.

भांजे साहब को भी घूमना खूब पसंद है, और वो खूब एन्जॉय करते हैं, बस ये है कि घुमने के दौरान ये साहब इधर उधर भागते फिरते हैं और मुझे भी भगाते फिरते हैं अपने पीछे. कई बार तो दौड़ने के मामले में ये मुझे भी पीछे छोड़ देते हैं. लेकिन फिर भी अच्छा लगता है इसके पीछे यूँ भागना भी..

घुमने जाने पर तो भांजे साहब पोज देने में भी उस्ताद हैं. खूब पोज देते हैं और तस्वीरें खिंचवाना इसे बहुत पसंद है. देखिये पिछले कुछ आउटिंग की तस्वीरें..

ये है शाहरुख़ खान वाला पोज 
मैं तो भाग रहा हूँ, मामू मुझे पकड़ो अब 

पोज मैं हर जगह दे सकता हूँ...पुराने किले के सामने भी :)


मम्मा और मैं 
मामू, तुम मेरे से सीखो पोज देना 
ये देखो, ऐसे देते हैं पोज 
और ऐसे भी देते हैं पोज 

और ऐसे भी 
और इसे कहते हैं स्टाइल..
और इसे भी...
और अब मामू तुम भी सीख रहे हो पोज देना 
मामू, तुम नहीं बताओ..मैं खुद पढ़ लूँगा पुराने किले के बारे में 
मैं थक गया हूँ बहुत, अब मद्रास कॉफ़ी हाउस की कोल्ड कॉफ़ी की बारी..

और बाकी की बातें हम अगले पोस्ट में करेंगे..चलते हैं..टाटा..बाय बाय..

5 comments:

  1. ये बात तो सही है, एकदम उस्ताद हो गया है ये पोज़ देने के मामले में...और तुमको ये ग़लतफ़हमी कब से हो गई कि तुम इससे तेज़ भाग सकते हो ? :/ :D

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  2. बहुत सुन्दर चित्र।

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  3. वाह ! खुश रहो मस्त रहो।

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