घड़ी तो नहीं रही, पर वो समय भी नहीं रहा लेकिन हम तो वही हैं..

Sunday, December 27, 2015
इतवार की सुबह है, पता नहीं कहाँ से अचानक पुरानी बातें याद आ रही हैं. सुबह की शुरुआत रफ़ी साहब के उसी गाने से हो रही है जिससे वर्षों पहले कभी...
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