दीदी के हाइकू और मेरी बातें


हाइकू जापानी कविता पद्धति है. मुझे ये हाइकू लिखना नहीं आता. लेकिन मेरी दीदी जो कि ब्लॉगर भी है, ‘कही-अनकही’ और ‘कलाम-ए-मोहब्बत’ जैसे मशहूर ब्लॉग की मालकिन, वो हाइकू लिखने में उस्ताद है. चलते फिरते, घूमते टहलते काम करते वो हाइकू लिख डालती है. जाने कैसे लिखती है. मेरे से तो एक भी नहीं लिखा जाता. वो सिर्फ हाइकू ही नहीं बल्कि जाने कितने और विधियों में उस्ताद है. जाने कैसे इतनी कलाओं में माहिर हो गयी वो. मैं कहता हूँ, मुझे भी सिखा दो ये सब तो बहाने बनाती है. उसने भाई बहनों के खूबसूरत रिश्ते पर कई सारे हाइकू लिखे हैं. मुझे वैसे तो उसके सभी हाइकू बेहद पसंद है लेकिन भाई बहनों पर लिखे गए हाइकू मेरे दिल के ज्यादा करीब हैं. मेरी ये खुशनसीबी है कि इन हाइकू को लिखते वक़्त दीदी के दिमाग में उसके छोटे भाई की, यानी मेरी तस्वीर थी. उसने माना भी है, कि मैं इन्स्परेशन रहा हूँ इन हाइकू के पीछे. तो ये सारे हाइकू मैं खुद को समर्पित कर रहा हूँ. दीदी के हाइकू, कवितायें और कहानियाँ देश के कई सारे पत्र-पत्रिकाओं में छपते आ रहे हैं. लेकिन आज जो इस पोस्ट के कुछ हाइकू ऐसे हैं जो पूरी तरह से अप्रकाशित हैं. जिसे उसने सिर्फ मेरे लिए लिखा था, शायद मेरे कहने पर. आज बहुत खुश हूँ मैं उन हाइकू को यहाँ लगाकर.

ये सारे हाइकू यूँ तो भाई को ध्यान में रखकर लिखे गए हैं, लेकिन पढ़ते वक़्त मुझे अपनी सभी बहनें याद आती हैं. मोना, निमिषा, सोना, माही और दीदी भी. तो पढ़िए आप भी दीदी के लिखे कुछ हाइकु मेरी विशेष टिप्पणियों के साथ.

आगे बढ़ने से पहले, सबके लिए एक छोटा सा प्यारा सा सन्देश.. 

भाई बहन
अनमोल ये रिश्ता
संजो रखना

भाई छोटा हो बड़ा हो, वो बहन का लाडला होता है, बहन छोटी हो या बड़ी हो भाई की लाडली होती है. शायद इसलिए मेरे लिए जितनी लाडली मेरी छोटी बहनें हैं उतनी ही दीदी भी. ये भी तो अकसर ऐसी हरकतें करती है कि लगता है मेरे से बड़ी नहीं बल्कि छोटी है. 

छोटा या बड़ा 
बहना का लाडला
होता है भैया |

भाई बहन
एक धागे से बँधे
जीवन भर । 

हाँ भाई बहन एक धागे से ही तो ताउम्र बंधे रहते हैं, वो धागा जो प्यार का धागा होता है. शायद इसलिए तो किसी शायर ने कहा है, बहन ने भाई के कलाई पर राखी नहीं बल्कि प्यार बाँधा है. अपना प्यार. दीदी तुम्हें यहाँ इस हाइकू में “प्रेम का धागा” की जगह “प्यार बाँधा है” लिखना चाहिए था. वो शायर जिन्होंने पहले ये बात कही थी, वो बुरा नहीं मानते. खैर, पढ़िए राखी पर ही लिखे गए तीन हाइकु दीदी के.
बहना बांधे
भाई की कलाई पे
प्रेम का धागा ।


तोड़े न टूटे
ऐसा है ये बंधन
कच्चे धागे का ।

दूज का टीका
भैया के माथे पर
लगाती नन्ही |

राखी ऐसा त्यौहार है, जो सिर्फ भाई बहनों के लिए होता है. बहन जब भाई के कलाई पर राखी बाँधती है उस वक़्त भाई को भी और बहन को भी जाने कितने पुराने पल याद आते हैं. घरवाले जो आसपास मौजूद होते हैं, ऐसे मौके पर कुछ न कुछ टिप्पणी पीछे से करते रहते हैं, “कितना लड़ते थे ये दोनों बचपन में”, “और फिर एक दूसरे के लिए भी सब से लड़ लेते थे”, “ हमेशा साथ पढ़ना, साथ खेलना, साथ रहते थे ये”. ऐसे जिक्र, ऐसे किस्से बेसाख्ता ही निकल आते हैं घरवालों के मुहँ से. और राखी बाँधते वक़्त भाई के, बहन के आँखों में वो सारे खूबसूरत पल लड़ना, झगड़ना, प्यार दिखाना, रूठना, मनाना.. एक फिल्म की तरह चलने लगती हैं. शायद इसलिए दीदी ने कहा है..

कितनी यादें
धागे संग बाँधती
छोटी बहना ।

जो भाई दूर रह रहे होते हैं, राखी के अवसर पर बहन के पास नहीं आ पाते, बहनें तब उदास हो जाती हैं. भाई भी उदास होता है, कि इस दिन वो अपनी बहन के साथ नहीं है. भाई को राखी बहन डाक द्वारा भेजती है, लेकिन फिर भी मन में एक टीस तो रहती ही है कि भाई मेरा दूर है, उसे मैं राखी नहीं बाँध पाऊँगी.

चिठ्ठी से भेजी
स्नेह में पगी डोर
भैया ने बांधी ।

राखी जब भाई के पास डाक द्वारा पहुँचती है और जब भाई उस “प्यार” को अपने कलाई पर बाँधता है, उस वक़्त भी उसके मन में बहन के साथ बिताये वो खूबसूरत पल आँखों के सामने से गुज़रते हैं, उसका बचपन उसे याद आता है. वो अपनी कलाई पर खुद राखी बाँधते हुए बीते दिनों में पहुँच जाता है, यादों के जाने किन पगडंडियों पर चलने लगता है वो. 

शायद भाई के दूर रहने पर सबसे ज्यादा उसे बहनें मिस करती हैं. भाई पढ़ाई के लिए या नौकरी के लिए दूसरे शहर जाता है, तो बहन को उसकी याद बहुत आती है. बहन के लिए भाई ही बचपन से उसका सबसे अच्छा दोस्त होता है. बहन को सब बातें याद आती हैं, भाई के साथ खेलना, लड़ना, झगड़ना, हँसना, बदमाशियाँ प्लान करना... और इन सब बातों को याद कर के वो अकसर उदास हो जाती है. 

उदास बैठी
घर पर बहना
भैया विदेश |

हाँ, भाई को याद कर के बहन की आँखों में अकसर आँसू आ जाते हैं. वो सोचती है कि भाई अब दूर चला गया है. वो भाई पर अपना जो अधिकार जमाते आ रही होती है बचपन से, उस ‘अधिकार जमाने’ को वो मिस करती है. बचपन से ही वो ये मानते चली आती है कि मेरे भाई पर सिर्फ और सिर्फ मेरा ही अधिकार है, लेकिन जब वो बाहर निकल जाता है किसी दूसरे शहर तो बहन को जाने क्यों लगता है कि अब भाई उससे दूर चला गया है. उसका अपने भाई पर वैसा अधिकार नहीं रह गया अब. दूसरे लोग भी उसके भाई की ज़िन्दगी में शामिल हो गए हैं. लेकिन सच तो ये है कि भाई उससे दूर कभी जाता नहीं, लेकिन बहन को अकसर लगता है अब मेरे भाई पर मेरा उतना अधिकार नहीं रह गया. वो यही सोचती है जो दीदी ने इस हाइकू में लिखा है. 

रोई बहना
भैया बसा विदेश
हुआ पराया ।

वैसे ये अलग बात है कि मजाक में ही भाई को ऐसे कई सारे ताने सुनने पड़ते हैं, कि तुम तो दूर चले गए, जानबुझकर मुझे भूल गए हो...पराया कर दिया तुमने मुझे. लेकिन ये सब सिर्फ बातों बहनों की बदमाशियाँ होती हैं, उनका मजाक... उनके स्वीट से ताने. मोना, निमिषा से तो जाने कितनी ही बार मुझे ये ताना सुनने को मिलता है. कोई भी बात हो जाती है, दोनों एक सुर में कहती हैं... “भैया तुम तो भूल गए मुझे”.

निमिषा मेरे से बहुत छोटी है, इस ब्लॉग पर तो जाने कितनी बार उसका जिक्र किया है मैंने. दीदी के लिखे कुछ हाइकू मुझे सिर्फ उसकी याद दिलाते हैं, निमिषा की. हालाँकि ये हाइकू भाई को केंद्र में रखकर लिखा गया है, लेकिन मुझे फिर भी इन्हें पढ़ते वक़्त निमिषा की याद आती है. 

छोटा सा भैया
गोदी में जब लिया
ममता जागी ।

चलना सीखे
दीदी का हाथ थाम
नन्हा सा भैया ।

निमिषा के बचपन की वो तस्वीर मेरे मन में कैद है जब मैं निमिषा को गोद में बिठाकर खिलाया करता था...वो मेरे गोद में सो जाती थी. उसे बाहर घुमाने मैं ले जाता था. उसके साथ बच्चा बनकर खेलता था मैं. वो जिद करने लगती कभी की बाहर घूमना है मुझे, तो उसे बाहर घुमा लाता था. अब निमिषा मेरे काँधे पर चढ़कर तो नहीं घूमी है कहीं, लेकिन मेरी गोद में तो घूमी ही है वो हर जगह. बड़ा प्यारा सा ये हाइकू है दीदी का. 

छोटी बहन
भाई के काँधे चढ़
मेला घूमती ।

बहन अगर छोटी हो या बड़ी, भाई से जिद करना बहनों में एक बाई डिफाल्ट क्वालिटी होता है. बहनें जिद करने में उस्ताद होती हैं. और सच पूछिये तो बहनों का यही रूप सबसे ज्यादा मन को भाता है, जब वो जिद करती हैं किसी भी चीज़ के लिए, परेशान करती हैं आपको तब तक जब तक आप उनकी जिद पूरी न कर दें. कुछ नालायक किस्म के भाई होते हैं वो जो बहनों के इस जिद से इरिटेट हो जाते हैं, चिढ़ते. मुझे तो बहनों की सबसे खूबसूरत बात यही लगती है. बहनें जिद करती हुई बहुत प्यारी लगती हैं. मेरे साथ तो दीदी, मोना, सोना और निमिषा सभी खूब जिद करती हैं.

जिद करती
भाई का थामे हाथ
नन्ही-सी परी ।

बहनें जिद तो करती ही हैं, साथ में लड़ती भी खूब हैं. रूठती हैं बातों बातों में. कितनी बार तो बस वो जान बुझकर रूठ जाती हैं, कि मेरा भैया मुझे मनायेगा. एक रूठी बहन को मनाता हुआ भैया, इससे बेहतर दृश्य कुछ और हो सकता है क्या? 


रूठी बहना
छोटी-छोटी बातों में
मनाता भैया |

भाई के लिए सबसे ख़ास दिन वो होता है जब बहन की डोली उठती है. भाई उदास हो जाता है, वही बहन जो उसके साथ खेलती थी, लड़ती थी, रूठती थी, नखरे दिखाती थी, उस बहन को उसे विदा करना होता है. जब बहन विदा होती है तो भी भाई के आँखों के सामने उसका पूरा बचपन गुज़रता है. ये हाइकू मुझे मोना की शादी की याद दिलाता है. मोना के विदाई का वो सख्त सा दिन. 

डोली में बैठ
विदा हुई बहना
यादें दे गई ।

और यही लगेगा उस दिन भी जब निमिषा विदा होकर जायेगी. जब निमिषा की शादी होगी, मन में मेरे भी यही ख्याल आयेंगे न. 

गोदी में खेली
विदा हुई बहना
भैया अकेला ।

एक बहन के लिए सबसे बड़ी बात होती है कि उसका भाई ठीक से रहे. खासकर बहन जब बड़ी हो तो वो बिलकुल माँ सा ख्याल रखती है अपने छोटे भाई का. मेरे लिए दीदी ऐसी ही है. वो मेरा ख्याल वैसे ही रखती है जैसे माँ. जिस दिन उसे पता चलता है कि मैं बिना खाए पिए दिन भर इधर उधर काम के सिलसिले में भटकता रहा हूँ, वो थोड़ी खफा हो जाती है. “खुद का ख्याल नहीं रखते” डांट भी देती है. कहती है मुझसे, तुम जानते हो तुम नहीं सही से खाते तो मेरे से खाना नहीं खाया जाता. तुम जब ठीक से रहते हो, वक़्त पर खाते पीते हो, मैं भी खुश रहती हूँ. जब भी मिलता हूँ दीदी से, वो जब खिलाती है मुझे, ये कहते हुए “बाहर तो जाने कैसे खाते होगे...मेरे सामने हो तो खा लो ठीक से”, उस वक़्त उसकी आँखों में देखता हूँ मैं कि सिर्फ इस एक बात से उसे कितनी संतुष्टि मिलती है. 

अपनी रोटी
भाई को खिला कर
तृप्त बहना ।

डांटती भी खूब है दीदी. मेरी लापरवाही पर.. मेरी गलतियाँ पर. दीदी ही नहीं, मोना जो कि मेरे से छोटी है, ऐसे डांटती है मुझे कभी कभी कि लगता है मैं जाने कितना छोटा हूँ उससे. रौब जमाती है मुझपर. बहनें छोटी हों या बड़ी, जिस तरह जिद करना उनकी डिफाल्ट क्वालिटी है, ठीक वैसे ही डांटने का सॉफ्टवेर भी उनमें बाई डिफाल्ट इंस्टाल रहता है. बस मौका चाहिए होता है उन्हें भाई को डांट सुनाने के लिए. दीदी ने यही बात कुछ इस तरह कही है...(दीदी के इस हाइकू में मैं एक मौडिफिकेसन कर रहा हूँ...कुछ जोड़ रहा हूँ मैं. जानता हूँ कि हाइकू के कुछ नियम होते हैं, लेकिन भाई बहन की बात जब हो तो नियमों को इग्नोर कर देना चाहिए. 

छोटी ‘या बड़ी’ बहना
अम्मा बन डाँटती
मुस्काता भैया ।

असल में भाई अपनी बहन की डांट पर इसलिए भी मुस्कुराता है क्योंकि वो जानता है बहन का ये गुस्सा नहीं बल्कि बहन का प्यार है. भाई को बहन के गुस्से पर प्यार आता है. और जब बहन के डांट पर भाई खिलखिलाकर हँसता है, तो चाहे कितने गुस्से में बहन हो, हँसते हुए कह ही देती है... “शैतान हो तुम एक नंबर के.”

खिलखिलाता
दीदी की डाँट सुन
शैतान भैया ।

लेकिन कभी कभी भाई जब ज्यादा गलतियाँ कर देता है, उसकी ज्यादा लापरवाहियों पर बहन उसे बहुत बुरी तरह डांट देती है, जैसे अकसर दीदी डांटती है मुझे जब मेरी किसी बात से उसे तकलीफ पहुँचती है या कभी मेरे से कोई गलती होती है. लेकिन मैं जानता हूँ कि डांटने के बाद दीदी को कितना गिल्ट होता है, “बेकार में डांट दिया मैंने, थोड़ा गुस्सा कंट्रोल कर लेती”, ये सोचती है दीदी उस वक़्त. अकेले में, लोगों से छुप कर बहन इसी गिल्ट की वजह से रोती भी है..

भाई को डाँट
छुप कर अकेले
रोती बहना ।

बहन अपने भाई से कभी कुछ नहीं माँगती. भाई चाहे जितना भी बड़ा आदमी बन जाए, बहन बस भाई का साथ माँगती है. असल में जो बहन को चाहिए होता है, भाई का साथ, भाई का प्यार, दुलार सब उसे बिना मांगे ही मिल जाता है. जैसे एक बच्चे को जरूरत नहीं पड़ती अपनी माँ से प्यार माँगने की ठीक उसी तरह भाई बहन के साथ होता है. बिना कहे, बिना माँगे बहन को वो सब मिल जाता है जो उसे चाहिए होता है, और भाई को भी बिना कहे, बिना माँगे वो सब मिल जाता है जो वो चाहता है. एक भाई के लिए बहन का होना या बहन के लिए भाई का होना कितनी बड़ी बात होती है. 

जो कुछ माँगा
भैया ने सब दिया
बिना शर्त के । 

बहनें कितना सुरक्षित महसूस करती हैं बहनें जब उसका भाई उसके साथ होता है. वो जानती हैं कि मेरा भाई मेरे साथ है तो मुझे किसी प्रकार का डर नहीं. वो मुझे हर मुसीबतों से बचाएगा. परेशानियों की, दुःख की खाई चाहे कितनी भी गहरी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, भाई का हाथ थाम कर मैं उस खाई को पार कर जाऊँगी. 

थाम के हाथ
खाई पार कराता
भाई का साथ ।

और जब बहन ये भी जानती है कि मैं कभी किसी मोड़ पर अगर लड़खड़ाई तो भी भाई मुझे रहेगा सम्हालने के लिए. बहनें भाई पर डिपेंडेंट हो जाती हैं, कि वो मेरा हाथ थाम लेगा, जब भी ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर मेरे कदम डगमगायेंगे. 

भैया ने थामा
लडखडाई जब
छोटी बहना ।

असल में भाई अपनी बहन के लिए एक सुरक्षा कवच होता है. बहन का रक्षक होता है वो, ये फर्क नहीं पड़ता भाई छोटा है बड़ा है, बहन के लिए एक भाई सबसे बड़ा सहारा होता है. सिर्फ इस सोच से बहनें कितना सिक्युर्ड महसूस करती हैं कि भाई मेरे साथ है तो मुझे कुछ भी नहीं हो सकता. हर दुःख हर परेशानी को वो मुझतक आने से पहले ही रोक लेगा. 

छोटा या बड़ा
बहन का रक्षक
होता है भाई ।

भाई की बाँहें
बहन का कवच
कोई न डर ।

बहन के लिए दुनिया का कोई सुख मायने नहीं रखता, सिवाए उसके भाई के. उसे और कुछ नहीं चाहिए होता है, बस उसकी एक ही तमन्ना होती है कि मेरा भाई मेरे साथ रहे हमेशा. पूरी ज़िन्दगी मेरा हाथ थामे रहे वो. बहन की बस एक ही दुआ होती है हमेशा...
बहना मांगे
ज़िन्दगी भर का हो
भाई का साथ ।

बहुत ही पवित्र बहुत ही खूबसूरत रिश्ता होता है भाई बहन का. शायद इससे निश्चल इससे पवित्र कोई दूसरा रिश्ता नहीं. दुःख होता है, अफ़सोस होता है जब भाई बहन के इस पावन रिश्ते का लोग मान नहीं रखते. दीदी ने आखिरी हाइकु में यही बात तो कही है..
पवित्र रिश्ता
पैसो से तोल कर
कलंक न दो ।



8 comments:

  1. overwhelmed....:)
    निःशब्द...<3 :*

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  2. भाई बहन के पावन नाते को मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति देते हाइकू.... बहुत अच्छी लगी पोस्ट

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  3. वाह!!! खूबसूरत आलेख खूबसूरत हाइकुओं के साथ....तुम दोनों को बधाई !

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  4. वाह!!! खूबसूरत आलेख खूबसूरत हाइकुओं के साथ....तुम दोनों को बधाई !

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  5. बहुत प्यारा आलेख और स्नेह में भीगे हाइकु मन मोह गए ... दोनों के लिए ढेरों शुभकामनाएँ

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  6. Bahut khoob....and beautiful pictures :)

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  7. प्रेम और स्नेह में डूबे सभी हाइकू दिल को छूते हैं ...
    भाई बहन का रिश्ता ही शायद ऐसा रिश्ता अहि जो कभी नहीं बदलता जीवन भर ...

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  8. सुन्दर हाइकू... सुन्दर वर्णन :)

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