उलझी सुलझी सी ये रिश्तों की डोर


जब से एक मित्र की बीमारी के बारे में सुना है तब से थोड़ा मन उदास है.मेरा वो मित्र जिससे दोस्ती हुए अभी कुछ ही महीने हुए हैं, एक बीमारी से लड़ रहा है और अब कितना समय और उसके पास बचा है ये भी ठीक से कोई नहीं कह सकता.हम सब तो लगातार दुआएं कर रहे हैं की हमारे वो दोस्त उस बीमारी से जल्द ही ठीक हो जाएँ.दुआओं में असर होता है, क्या पता कोई चमत्कार ही हो जाए और हमारे वो दोस्त बिलकुल स्वस्थ हो जाएँ.ऐसे चमत्कार कितने ही हुए होंगे दुनिया में, तो क्या एक और चमत्कार नहीं हो सकता? जहाँ एक तरफ अपने इस दोस्त के लिए मन उदास है वहीँ दूसरी तरफ मन में काफी गुस्सा है, समाज की एक गन्दी और घटिया सोच के लिए.

दोस्ती एक बहुत ही पवित्र और सच्चा रिश्ता होता है लेकिन यही दोस्ती अगर एक लड़का और लड़की के बीच हो जाए तो लोग उसे शक की निगाह से देखने लगते हैं.शादी के बाद लड़का चाहे जितनी दोस्ती निभाता रहे लेकिन लड़की अगर शादी के बाद अपने किसी दोस्त(लड़का) से दोस्ती बरक़रार रखती है तो समाज में तरह तरह की बातें होने लगती हैं.ज़्यादातर लड़कियों के लिए शादी के बाद दोस्ती निभाना लगभग नामुमकिन सा हो जाता है, वहीँ लड़के की सभी दोस्ती शादी के बाद भी बरकार रहती है.लड़की का शादी के बाद किसी लड़के दोस्त से खुलकर बातें करना, मिलना जुलना समाज पचा नहीं पाता और इसका शिकार होती हैं बेचारी वो लड़की, जिसे समाज के लगाये गए आरोप सुनने पड़ते हैं.समाज के इस गन्दी सोच का शिकार होना पड़ता है.समाज के वैसे ही सोच का शिकार इस बार मेरी एक बहुत ही अच्छी दोस्त हुई हैं.

मेरी वो मित्र उम्र में मेरे से बड़ी हैं लेकिन फिर भी पिछले कुछ सालों से हमारी बहुत अच्छी दोस्त हैं.वो बिलकुल मेरी तरह हैं, अगर आप मुझे जानते हैं तो बस ये समझ लें की आप उन्हें भी जानते हैं..हमारे सोचने का नजरिया, आदतें काफी हद तक मिलती हैं.मेरी उनसे लगातार बातें होते रहती है.कुछ समय से जाने क्यों मुझे लगता था की वो कुछ परेसान सी हैं.उनके मुस्कुराते चेहरे के पीछे छुपे दर्द को मैं महसूस कर सकता था.मैंने परेशानी की वजह पूछना भी चाहा लेकिन कभी पूछ नहीं पाया.मैं सोचता था की शायद तबियत ख़राब चल रही होगी उनकी या फिर कुछ व्यग्तिगत समस्याएँ होंगी जिनके वजह से वो थोड़ी परेसान सी रह रही हैं.एक दिन जब उनसे काफी लम्बी बातचीत हुई तो उनकी उदासी का सबब समझ में आया.

उनका एक बेहद करीबी मित्र है, जिन्हें मैं भी जानता हूँ.कुछ समय पहले इन्होने ही अपने उस दोस्त से मेरी जान पहचान करवाई थी.बेहद खुशमिजाज, साफ़ दिल वाला, हँसमुख और प्यारा सा शख़्स है.एक अर्सा हो चूका है इनकी दोस्ती हुए और दोस्ती के इस लम्बे सफ़र में दोनों ने दोस्ती खूब निभायी है.इतने सालों से एक दुसरे का हमेशा मोरल सपोर्ट रहे ये दोस्त हमेशा एक दुसरे का हौंसला बढ़ाते आये हैं.लेकिन इन दोनों की इस तरह की दोस्ती समाज, नाते रिश्तेदार को हमेशा से नापसंद रहा.मेरी दोस्त के रिश्तेदार, उनके सो-काल्ड शुभचिंतकों ने उन दोनों की दोस्ती पर तरह सवाल खड़े किये, सोच ऐसी गिरी हुई उन लोगों की की उन्होंने उनके घर में आग लगाने तक की कोशिश की.अगर घरवालों को उनपर अटूट विश्वास नहीं होता तब अपने आग लगाने वाले मिसन में कामयब हो भी जाते. उन शुभचिंतकों ने तो उनके बेटे तक को नहीं छोड़ा.माँ के बारे में तरह तरह के शक भरी और गन्दी बातें उसके दिमाग में डालने की कोशिश भी की गयी थी.अगर सही वक़्त पर इस बात को और उस बच्चे को समझाया नहीं गया होता तो क्या पता छोटा बच्चा जाने किस बात पर कैसे रिएक्ट कर जाए...इन्ही सब बातों से वो हमेशा परेसान रहती आ रही थीं....वो अन्दर तक टूट गयीं थी, ये सोच कर की उन लोगों को जिन्हें वो अपना समझती थी, अपना शुभचिंतक समझती थीं, वही उनके बारे में ऐसे ख्याल रखते हैं..उन्हें काफी चोट भी पहुँची थी इस बात से...उन्होंने फैसला किया की इन सब बातों से डर कर या घबरा कर वो अपनी दोस्ती नहीं तोड़ने वाली...और समाज या नाते रिश्तेदार जो भी करना चाहे कर लें, लेकिन उनसे घबरा कर एक सच्चे और पवित्र रिश्ते को वो तोड़ने वाली नहीं हैं.अपने दोस्त पर, अपनी दोस्ती पर उन्हें गर्व है.उनका कहना है की अगर वो गलत नहीं हैं तो समाज या लोगों से क्यों डर कर एक सच्चे रिश्ते को कुर्बान करना.

उनके वो दोस्त वही हैं जिनका जिक्र मैंने ऊपर किया है...वो अभी एक कैंसर सिंड्रोम से जूझ रहे हैं और बेहद मुमकिन है की वो कैंसर से इस जंग में हार भी जाए.एक दिन बातचीत के दौरान काफी इमोशनल हो गयीं थी मेरी दोस्त....मुझसे कहने लगीं "भगवान ने हर तीन साल पर मेरे किसी न किसी अपने को मुझसे छिनकर मुझे दुखी करने का इरादा कर रखा है...हँसना ठीक से शुरू भी नहीं कर पाती की वो फिर से मुझे रुला जाता है...पता नहीं वो क्या चाहता है..अभी तीन साल ही हुए हैं मेरी मौसी को दुनिया से गए की अब मेरे इस दोस्त की बारी है...और सबसे दुःख की बात ये है की अपने इस दोस्त की मैं कुछ भी मदद नहीं कर सकती, मदद तो दूर की बात है, मैं तो उसके लिए दुखी भी नहीं हो सकती..जब मेरे दोस्त के साथ ऐसा हो रहा था तो लोग पूछते हैं की मैं दुखी क्यों हूँ? इसका मैं क्या जवाब दूँ? परिवारवाले या रिश्तेदार में कुछ ऐसा होता तो वो जस्टफाइड है लेकिन एक दोस्त के साथ ऐसा हो रहा तो हम दुखी क्यों हो रहे इस बात का क्या जवाब दें?ऐसे मुस्किल वक़्त और बुरे समय में भी लोग गन्दा सोचना नहीं छोड़ते, तो बड़ी घृणा होती है समाज और लोगों के इस सोच से.गुस्सा आता है जब आप ऐसी बातें किसी के साथ शेयर नहीं कर पाते, खुलकर अपने दोस्त के आखिरी समय में उसके साथ खड़े नहीं हो पाते..सिर्फ इस वजह से की लोग आपको गलत समझने लगेंगे...समाज आपपर तरह तरह के इलज़ाम लगाने लगेगा.वो कहती हैं की वैसा इन्सान जिसने आपकी हमेशा मदद की है, जब वो अपने अंतिम समय में है और बेहद हारा हुआ महसूस कर रहा है, तो ऐसे में काफी खलता है की मैं उससे खुलकर बात भी नहीं कर सकती.अगर उदास रहूँ तो समाज सवाल उठता है की एक दोस्त के लिए ऐसे उदास क्यों हो रहे हैं हम.

वो काफी भावुक हो गयीं थी ये सब बातें कहते हुए...इधर उनसे मेरी काफी बातचीत होती है, मैं सिर्फ हौंसला देने के अलावा और कुछ कर भी नहीं सकता.लेकिन अन्दर ही अन्दर मैं बहुत खफा हूँ समाज के इस सोच से..आखिर लड़की की शादी हो जाने के बाद वो क्यों अपनी दोस्ती बरकार नहीं रख पाती.मैं उन दोनों के दोस्ती के बारे में लगभग सारी बातें जानता हूँ.उन्हें और उनके दोस्त को करीब से जानने समझने का मौका मिला है मुझे..उनके रिश्ते की खूबसूरती को मैं अच्छे से जानता और समझता हूँ और ऐसे खूबसूरत रिश्ते पर कोई सवाल खड़ा करता है तो मन में बहुत तकलीफ होती है.मेरी भी काफी दोस्त हैं जिनकी शादी हो गयी है और जहाँ तक मुझे लगता है की उनमे से बहुत ऐसी हैं जो लड़कों से अपनी दोस्ती शादी के बाद कायम नहीं रख पाती,सिर्फ इस वजह से की लोग बातें बनायेंगे.आखिर ये कहाँ तक सही है? लड़कियां अपने पति को उनके सारे दोस्तों के साथ अपनाती हैं लेकिन लड़के अक्सर ऐसा नहीं कर पाते...लड़का-लड़की के बीच दोस्ती का रिश्ता कितना भी पवित्र क्यों न हो उसे क्यों हमेशा शक के घेरे में रखा जाता है.जाने क्यों एक लड़का और लड़की के बीच की दोस्ती समाज को हमेशा अखरता है...ऐसे कितने ही सवाल हैं जो आजकल मन में लगातार उठते हैं..और इन सब सवालों का कोई जवाब मुझे नहीं मिलता.

जो भी हो मुझे अपनी उस दोस्त पर गर्व है जिन्होंने अपनी दोस्ती को हर हाल में कायम रखा है....वहीँ दूसरी तरफ उनका वो दोस्त शायद अपनी ज़िन्दगी के आखिरी दिनों में है, उसके लिए रोज़ भगवान से हजारों दुआएं मांगता हूँ..मैं हर दिन भगवान् से यही प्रार्थना करता हूँ की वो जल्द ही स्वस्थ हो जाएँ ताकि उन दोनों की दोस्ती बनी रहे...हमेशा के लिए.


16 comments:

  1. अभि, सबसे पहले तुम्हारे इस दोस्त के लिए की जा रही दुआओं के लिए...आमीन !!!
    फिर बात तुम्हारी इस पोस्ट की...बहुत सही सवाल उठाया है तुमने...| एक लड़के और लडकी की दोस्ती तो वैसे भी सवालों के घेरे में रहती है, ऊपर से यदि उनकी शादी हो चुकी हो तो ये दोस्ती बरकरार रखना और भी मुश्किल...| मान लो, पत्नी इतने खुले दिल -दिमाग की हो भी कि वो अपने पति और उसकी महिला-मित्र का विश्वास करती रहे, पर उस महिला-मित्र के पति, घरवाले, नाते-रिश्तेदार भी वैसे ही हो, इसकी कोई गारंटी नहीं...| मानती हूँ कि कई बार दोस्ती की आड़ में गलत रिश्ते भी पनपते हैं, पर गलत रिश्ते कहाँ नहीं पनप सकते...? क्या कोई इस बात की गारंटी दे सकता है कि उसके परिवार के किसी करीबी रिश्ते में कुछ गलत नहीं...? साली-जीजा, देवर-भाभी...यहाँ तक कि ससुर-बहू के गलत रिश्ते भी कई बार नज़रों के सामने से गुजरते देखा होगा हम सब ने...| अब तो अगर समाचारों पर निगाह डालो तो खून के रिश्ते भी कई बार बड़े घिनौने रूप में सामने आते हैं...तो फिर शक की सुई सिर्फ दोस्ती पर ही क्यों...?
    तुम्हारे गुस्से को बहुत अच्छी तरह से समझ रहे और उस लडकी की मजबूरी भी, जो कहीं न कहीं अपने सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की डोर से बहुत गहरे तक जुडी है और उसे भी नहीं तोड़ सकती...न ही अपने दोस्त से रिश्ता तोड़ पा रही है...| वैसे ये रिश्ता टूटना चाहिए भी नहीं, वरना शायद न तो ये कहा जा सकेगा कि दोस्ती का रिश्ता सबसे मजबूत होता है और न ही ये कि...हर दोस्त ज़रूरी होता है...|
    कृष्ण-राधा के इस देश में शायद हम भी कभी सच्ची और पवित्र दोस्ती का अर्थ, उसके असल मायने को समझ सके...काश...!!!
    एक अच्छी और सार्थक पोस्ट के लिए बहुत बधाई...|

    प्रियंका

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  2. और हाँ...एक बात और भी...जाने क्यों मेरा दिल कहता है तुम्हारा ये दोस्त ज़िंदगी की जंग हारेगा नहीं...उससे जीत कर निकलेगा एक लम्बी और स्वस्थ ज़िंदगी जीने के लिए...|
    आमीन...!!!

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन विश्व तंबाकू निषेध दिवस - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(1-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

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  5. एक साथ दो बीमारों का ज़िक्र किया है तुमने इस पोस्ट में.. बीमार दोस्त और कैंसर पीड़ित समाज.. दोस्त के लिये तो मेरी दुआएं हमेशा साथ हैं.. लेकिन कैंसर पीड़ित समाज का इलाज शायद मुमकिन नहीं.. जब छोटा था तो सोचता था कि हमारा समय दकियानूसी है और जब अगली पीढ़ी आयेगी तो सब ठीक हो जाएगा.. एक पूरी की पूरी नयी पीढ़ी निकल गयी सामने से, मगर रोग जस का तस है.. बल्कि और बिगडा है!! हम असहाय सब देखने को मजबूर हैं.. बातें बड़ी-बड़ी कर लेते हैं, लेकिन बदलाव...!! उफ्फ, कैसी बेबसी है!!

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  6. अभिषेक ,आपके मित्र के जीवन के लिये मेरी भी दुआएं लगें । जहाँ तक लडके-लडकी की दोस्ती का सवाल है पहली तो यही कि आपकी तरह उजली और साफ सोच हर जगह नही होती । शक-सन्देह सदियों से चले आ रहे हैं । उन्हें कभी मिटाया नही जा सकता क्योंकि यह दोस्ती की नही स्त्री व पुरुषवादी सोच है । अच्छा यही है कि आपको जिस मित्रता पर भरोसा है उसे बिना किसी की टिप्पणी की चिन्ता किये बनाए रखें । क्योंकि अच्छे व सच्चे मित्र सचमुच बडे भाग्य से ही मिलते हैं । हाँ हम समाज से अलग नही हैं सो कुछ खयाल तो सभी को रखना ही होता है ।

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  7. अभिषेक तुम्हरे मित्र की स्वास्थय कामना के साथ शुभकामनाएँ.

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  8. मेरी हृदय से दुआ है कि उन्हें स्वास्थ्य लाभ हो।

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  9. इन सब बातों से मन में कई भाव एक साथ आ जाते हैं कि शब्द देना मुश्किल हो जाता है .. एक अफ़सोस..बस..

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  10. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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  11. शुभकामनायें वे जल्द ठीक हों.....

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  12. पहले भी पढ़ा था इसे... पढने के बाद बस मौन प्रार्थनाएं निकली थी हृदय से.
    आज भी प्रार्थनारत है मन... दोस्त और दोस्ती सलामत रहे!

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  13. ऐसी दोस्ती रूहानी होती है... समाज में कम ही दिखाई देती है इसलिए कम लोग ही समझ पाते हैं...आपके दोनों दोस्तों के लिए ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद...

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  14. बहुत पुरानी पोस्ट है यह... लेकिन यह जानने की उत्सुकता है कि आपके मित्र की अब क्या दशा है।

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  15. आपके मित्र अब कैसे हैं । हमारी भी प्रार्थनाएं हैं उनके लिये।

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

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