एक्स्पोज़्ड:प्रशांत एंड स्तुति

भगवान कभी कभी बड़ा अन्याय करते हैं.पता ही नहीं चलता की किस गलती की सजा दे रहे हैं वो..अब देखिये न..इसे आप गलती ही कहियेगा न की भगवान ने जिंद...

ग़ालिब-गुलज़ार : गुलज़ार साहब के साथ कुछ लम्हे (७)

हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे,  कहते हैं कि गालिब का है अंदाज ए बयां और -गुलज़ार कभी कभी कोई रात फिल्म देखकर गुज़रती है...तो कभ...

इंजीनियरिंग के वे दिन (७)

आजकल बड़े अजीब अजीब से सपने देख रहा हूँ.सबसे मजे की बात ये है की इन दिनों वही सपने आ रहे हैं जिनके पूरा होने की कहीं कोई भी गुंजाइश अब नहीं ...

खुश रहो अहले-वतन! हम तो सफ़र करते हैं

"अजल से वे डरें जीने को जो अच्छा समझते हैं मियाँ! हम चार दिन की जिन्दगी को क्या समझते हैं?" - पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल जिन्द...

प्रिय राम(निर्मल वर्मा के पत्र) : २

(इन खतों को जिस दिन मैंने पढ़ा था, उसके बाद इसमें से कुछ न कुछ ड्राफ्ट में सेव करता गया.पोस्ट काफी बड़ी और क्लटरड हो गयी थी.इस वजह से काफी द...

प्रिय राम(निर्मल वर्मा के पत्र)

पिछले महीने पटना में एक किताब खरीदी थी - 'प्रिय राम'.इस किताब में निर्मल वर्मा के द्वारा अपने बड़े भाई चित्रकार रामकुमार को लिखे ...

ड्राइविंग थ्रू द हिमलायस

अब ये एक पुरानी खबर हो गयी है.कम से कम एक महीने पुरानी खबर.जब से ये पोस्ट लिखा था मैंने तब से ही पता नहीं क्यों मैं इस पोस्ट को अपने 'का...