ग़ालिब-गुलज़ार : गुलज़ार साहब के साथ कुछ लम्हे (७)

by 12/27/2011
हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे,  कहते हैं कि गालिब का है अंदाज ए बयां और -गुलज़ार कभी कभी कोई रात फिल्म देखकर गुज़रती है...तो कभ...Read More

इंजीनियरिंग के वे दिन (७)

by 12/22/2011
आजकल बड़े अजीब अजीब से सपने देख रहा हूँ.सबसे मजे की बात ये है की इन दिनों वही सपने आ रहे हैं जिनके पूरा होने की कहीं कोई भी गुंजाइश अब नहीं ...Read More

ड्राइविंग थ्रू द हिमलायस

by 12/08/2011
अब ये एक पुरानी खबर हो गयी है.कम से कम एक महीने पुरानी खबर.जब से ये पोस्ट लिखा था मैंने तब से ही पता नहीं क्यों मैं इस पोस्ट को अपने 'का...Read More
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