अनसुलझा सा कुछ

Sunday, May 29, 2011
दिन के बारह बज चुके हैं और आसमान जैसे ये फैसला नहीं कर पा रहा है की आज धुप के दर्शन होंगे या बादलों के.ठीक कुछ इसी तरह शायद मैं भी अभी तक ये...
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