मेरा इंटरनेट प्रेम और पहला ब्लॉग :)

बात है करीब 1999 की, एक दिन शाम में मेरे छोटे मामा घर आये और कहने लगे की उनके एक दोस्त ने एक नया अकाउंट खोला है इंटरनेट पे.हम तो उस समय इस इंटरनेट ज्ञान से बिलकुल परे थे..मम्मी,पापा, ने भी बस नाम ही सुन रखा था इस इंटरनेट का...हमारे समझ में कुछ ज्यादा नहीं आ रहा था..फिर मामा ने कहा की एक वेबसाइट है "हॉटमेल.कॉम", उसमे उनके दोस्त ने एक अकाउंट खोला है...स्कूल में जो कुछ कंप्यूटर विषय में पढ़ा था, उससे कुछ कुछ तो समझ में आ रहा था लेकिन कुछ ज्यादा पल्ले नहीं पड़ रहा था..मम्मी,पापा तो बिलकुल इस इंटरनेट ज्ञान से परे थी तो उनको लग रहा था की शायद जैसे कोई बैंक का अकाउंट खोलना होता है वैसे ही इंटरनेट पे भी अकाउंट खुलता होगा..पैसे लगते होंगे, मेहनत वाला काम होगा... मेरी कंप्यूटर के बारे में बुनियादी जानकारी अच्छी थी उस समय,लेकिन इस इंटरनेट के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था.. मालूम था तो बस ये की अब से दसवीं और बारहवीं की रिजल्ट इंटरनेट पे आयेंगे.तो हम लोग सब मामा की बातों को बहुत ध्यान पूर्वक सुन रहे थे...हमें लग रहा था की इंटरनेट पे अकाउंट खोलना कितनी बड़ी बात है और मामा के दोस्त ने अकाउंट खोला है तो हमें ये जानकार खुशी भी हो रही थी...अगले दिन मैंने अपने दोस्तों को ये बात बताई..कुछ मित्र मेरे इस इंटरनेट से बिलकुल अनजान थे, तो वो सब मेरी बातों को बड़े उत्सुकता से सुन रहे थे और सवाल पे सवाल किये जा रहे थे..मेरा एक बहुत ही अच्छा दोस्त है मती, उसे इंटरनेट के बारे में अच्छी जानकारी थी..उसने कहा, अरे यार मेरे घर में तो है इंटरनेट लगा हुआ और मैंने भी अपना अकाउंट बनाया है "यु.एस.ए डॉट नेट" पे..फिर उसने एक कागज पे अपना ई-मेल आई-डी लिख के मुझे दिया..अब तो मुझे ये लगने लगा, मेरे दोस्त भी जानते हैं इस इंटरनेट के बारे में और बस मैं ही अज्ञात हूँ इस विषय से..मेरे अंदर इंटरनेट के बारे में जानने की उत्सुकता और बढ़ गयी...पटना के बोरिंग रोड एरिया में कुछ इंटरनेट कैफे उस समय खुल गए थे  लेकिन उन कैफे में जाने की हिम्मत नहीं होती थी.सोचता था की एक तो कुछ आता है नहीं, उसमे से पैसे बर्बाद करना कैफे में जाकर, और कोई है भी नहीं जो मुझे ढंग से सिखला सके ये इंटरनेट. जैसे जैसे दिन बीतते गए, मेरे अंदर से इंटरनेट सीखने की उत्सुकता कम होती गयी...

साल 2000 के शुरुआत में.. 
मैंने एक मैथ कोचिंग ज्वाइन किया, जो की बोरिंग रोड के लक्ष्मी कोम्प्लेस में था..वहां एक दिन मेरी मुलाकात हुई शशांक से.वैसे तो वो बहुत तेज था पढ़ने में, मैथ के सवाल तो चुटकियों में बना लेता था..कोचिंग ज्वाइन करने से पहले मैथ में मैं कोई खास मजबूत नहीं था, इस कोचिंग में बहुत कुछ मुझे सीखने को मिला और एक नया कान्फिडन्स आया. तो अब मेरे और शशांक के बीच एक काम्पिटिशन सा रहता था की कौन सर के दिए सवाल को सबसे पहले बना के दिखता है..:) सबसे पहले या तो मैं बनाता था सवाल या शशांक....ऐसे ही दिन चल रहे थे की एक दिन शशांक से मैंने इस इंटरनेट की बात छेड़ दी. शशांक ने कहा की अरे मुझे तो मालूम है इंटरनेट के बारे में, अक्सर मैं भी जाता हूँ साइबर कैफे...उसकी ये बात सुनने के बात तो मेरे अंदर बेचैनी सी हो गयी..मैंने कहा , भाई चल अभी चलते हैं इंटरनेट पे..१ घंटे का पैसा मैं दूँगा..तू बस मुझे सिखा की कैसे काम करते हैं इस इंटरनेट पे.. उस दिन तो उसने बात टाल दी, लेकिन अगले दिन मैं और शशांक गए साइबर कैफे...वो मुझे दिखा रहा था याहू,गूगल का इस्तेमाल कैसे करते हैं..कैसे कोई वेबसाइट खोलते हैं...मैं भी बड़ी उत्सुकता से देख रहा था और बड़ा अच्छा महसूस कर रहा था, की इतने दिन से जिस चीज़ को सीखने की चाहत थी, आखिर वो पूरी हुई :) उसी दिन मैंने याहू पे अपना एक ई-मेल आई-डी बनाया..वो ई-मेल आई-डी अब तक मैं यूज़ कर रहा हूँ :) उस दिन घर जाकर बड़े ही उत्सुकता से सबको बताया, मम्मी को, पापा को, अपनी बहन को...की मैंने भी ई-मेल पे एक नया अकाउंट खोला है :)

अब तो मुझे जैसे इंटरनेट का शौक लग गया था..सप्ताह में 2 दिन  या 1 दिन तो चला ही जाता था इंटरनेट कैफे..एक दिन याहू मेसेंजेर पे एक अमेरिकन से दोस्ती हुई..वो कोई कोकटेल बार में काम करता था..करीब आधे घंटे उससे बातचीत हुई.ये मेरी पहली ऑनलाइन दोस्ती थी. :) जैसे जैसे दिन बीतते गए वैसे वैसे मुझे बहुत कुछ समाझ में आने लगा इस इंटरनेट के बारे में.कुछ खास जानकारियों के प्रिंट आउट लेना मैंने शुरू कर दिया था :) जब मेरे दोस्त वो प्रिंट आउट देखते तो वो भी उत्सुकता से पूछते थे, यार कैसे इंटरनेट से ये प्रिंट निकाल लेते हो.हमें भी तो बताओ..कुछ दोस्तों को भी मैंने सिखाया इंटरनेट..मेरे तो मजे थे, १ घंटे के पैसे मेरे दोस्त देते थे साइबर कैफे वालों को, और लगे हाथ मैं भी इंटरनेट सर्फ़ कर लेता था :) 

साल  2003, 
ऐसे ही एक दिन अखबार में पढ़ा ब्लोग्स के बारे में..जितनी जानकारी थी अखबार में, उससे बस यही समझ में आया की ब्लॉग एक तरह का मिनी-पर्सनल वेबसाइट है.सोचा मैंने की देखूं आखिर ये ब्लॉग कहते किसको हैं?.. 
अगले  दिन साइबर कैफे गया..गूगल.कॉम पे सर्च किया इस ब्लॉग के बारे में..बहुत सी जानकारियां मिली..फिर ये सर्च किया की ब्लॉग बनाते कैसे हैं..सर्च करने पे पता चला की रेडिफ.कॉम भी ब्लॉग बनाने की सुविधा देता है..रेडिफ पे अपना अकाउंट भी था..तो सोचा चलो क्यों न ब्लॉग बनाया जाए एक. करीब १ घंटे की मेहनत के बाद आखिरकार एक ब्लॉग बना ही लिया मैंने उस समय..बड़ा गर्वित महसूस कर रहा था, की अब तो मेरा भी एक पर्सनल वेबसाइट है. :P  

देखिये  जरा मेरे उस समय के ब्लॉग को जो मैंने साल 2003 में बनाया था (इस ब्लॉग का वेबएड्रेस मैं भूल चूका था, अभी कुछ दिनों पहले एक पुराने डायरी में इसका वेबएड्रेस मिला)
 
India-The Land of cultures and greatness

इस ब्लॉग का पहला पोस्ट 5 अप्रैल 2003 को लिखा गया था..यहाँ क्लिक करें :)

2006 में मैंने फिर से एक नया ब्लॉग बनाया, रेडिफ पे ही 

New Thoughts 

इसी साल मुझे ई-ब्लॉगर के बारे में पता चला..तो एक नया ब्लॉग इधर भी बना लिया ब्लॉगस्पोट.कॉम पे..लेकिन कुछ कारणों से उस ब्लॉग को साल 2008 में मैंने डिलीट कर दिया था.ये जो मेरा ब्लॉग है "मेरी बातें", इसे मैंने 2007 में बनाया था, अपने पुराने ब्लॉग को डिलीट करने के बाद, मैंने इस ब्लॉग का इस्तेमाल शुरू कर दिया..हालाँकि इसमें भी कई पुराने पोस्ट मैंने कुछ कारणों से डिलीट कर दिए.

इंटरनेट का ये प्रेम मेरा आज भी कायम है. ;) जब भी घर जाता हूँ तो एक दो बार तो माँ से डांट सुन ही लेता हूँ , कहतीं हैं जब देखो तब कंप्यूटर/लैपटॉप में घुसा रहता है :P 
अब तो फिर भी कुछ कामों में व्यस्त हो जाता हूँ कभी कभी, लेकिन एक ऐसा वक्त भी था जब ऑरकुट या इंटरनेट पे मैं 24x7 उपलब्ध रहता था :)


क्या करें 10 साल पुरानी बीमारी है, आसानी से जायेगी नहीं :) 

17 comments:

  1. Aapke is pyarki umr lambi ho!

    ReplyDelete
  2. hehehehe :d :d :d itta purana blog

    mujhe pta tha waise ye :) :) maine b to kuch post kiya tha.. dekh lena blog mein :)

    n i luv this love story :d

    ReplyDelete
  3. स्‍वागत है भाई आपका.

    ReplyDelete
  4. majedar post hai abhishek :)

    ReplyDelete
  5. तुम तो बहुत पुराने हो जी ब्लोग्स में :-)
    हमें तो पता ही नहीं था.

    वैसे किसे किसे सिखाए थे इंटरनेट ये तो बताओ?? कोई मेरे जान पहचान का भी है क्या उसमे :))

    ReplyDelete
  6. hello abhi !!!!

    i dnt kno how to comment n wat to say here on postsss..i guess i hvnt commented yet on ny blog of urs..
    maine pahle dekha tha blog jb tum orkut pe share karte the as status...fir kabhi dhyan nahi diya... i ws jst going thru ur orkut profile tab dekha abhi..

    itzzzz nice yaar...cool blog...achha likhte ho !!!!!!!!!!!!!

    good good :)

    ReplyDelete
  7. बहुत पुराने ब्लॉगर हैं आप तो...वैसे अक्सर दोस्त या सहेलियां ही परीचित कराती हैं,इंटरनेट से..

    ReplyDelete
  8. अच्छी लगी अभिषेक जी ये पोस्ट आपकी

    ReplyDelete
  9. ha ha ha ...wat a love story :)

    ReplyDelete
  10. उस जमाने में लक्ष्मी काम्प्लेक्स में एक ही साइबर कैफे हुआ करता था.. Cybacca नाम था शायद..
    हम भी सबसे पहले उसी में गए थे १९९९ में ही.. :)
    हम तो भाई अकेले ही हिम्मत करके चले गए थे, कि देखते हैं कि ये Yahoo! क्या बला है..

    ReplyDelete
  11. @प्रशान्त,
    हाँ याद है मुझे...लक्ष्मी काम्प्लेक्स में उसी समय वो कोको कोला वाला वैन जैसा कोल्ड ड्रिंक का दुकान खुला था, देखे ही होगे, अब भी है वो लेकिन अब बिलकुल बरबाद हो गया है, अब जब देखता हूँ तो दुःख होता है..क्यूंकि उस समय पहली बार जब मैं लक्ष्मी काम्प्लेक्स गया था तो वो देख के बहुत खुश हुआ था :)


    बाकी सभी का शुक्रिया,
    @Kshama ji, Sanjay Ji
    बहुत बहुत धन्यवाद :)

    ReplyDelete
  12. @सपना भाभी,शिखा,प्रिय(भाभी),दिव्या,
    शुक्रिया,

    @प्रीती दी,
    अब आप जाने भी दीजिये, क्यों सवाल कर रही हैं ब्लॉग पे? :)
    वैसे आपके जान पहचान में से किसी को मैंने इंटरनेट नहीं सिखाया :)


    @रश्मि जी,
    हम पुराने ब्लॉगर हैं , लेकिन बस नाम के :) आप सब जैसा लिखना तो चाह के भी नहीं हो पायेगा ;) ;)
    वैसे इंटरनेट मुझे मेरे दोस्त शशांक ने सिखाया था :)

    ReplyDelete
  13. ये बीमारी छोड़ना भी नहीं...:)

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपकी वजह से इसके पुराने पोस्ट को पढने का मौका मिल रहा है. शुक्रिया.. :)

      Delete
    2. @प्रशांत...फिर से पोस्टमॉर्टम करें क्या इसकी ब्लॉग पोस्ट्स का...??? :P

      Delete
    3. कर ही दिया जाए.. :D

      Delete
  14. अभी पढ़ते समय देखे की तुम लिखे हो कि सन २००० में तुम याहू गूगल खोल के देखे थे.. गूगल तब कहाँ था रे?? :P

    ReplyDelete

आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

Powered by Blogger.