कार-प्रेम.....ऐसी दीवानगी जो बढ़ती ही जा रही है :) :)

Thursday, July 29, 2010
पता नही क्यों बचपन से ही मुझे कारों का अजीब सा शौक रहा है..गाड़ियों की तस्वीरें जमा करना..उनके बारे में जितना हो सके उतनी जानकारियां इक्कठा ...

कल के दिन की रंगीनियत बयां करती ये तस्वीरें......

Tuesday, July 27, 2010
सबसे पहले तो मैं सब दोस्तों, बड़ों को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने मुझे अपना प्यार, आशीर्वाद दिया कल मेरे जन्मदिन पे..कुछ अच्छी बात रही...कुछ स...

जन्मदिन के किस्से....कुछ पुरानी यादों के नशे में : ८ :)

Monday, July 26, 2010
मेरी बहनों ने ये केक बनाया था मेरे जन्मदिन पे आज छब्बीस जुलाई है.वैसे तो कुछ खास बात नहीं है,आम दिन जैसा ही दिन है,कुछ लोगों का जन्मदिन...

गुलज़ारिश टच - आइये कुछ लम्हे गुलज़ार साहब के साथ बिताएं - पार्ट १

Friday, July 23, 2010
क्या पता कब कहाँ मारेगी ? बस कि मैं ज़िंदगी से डरता हूँ   मौत का क्या है, एक बार मारेगी   गुलज़ार की कुछ ग़ज़लें कुछ नगमें,उनकी कायनाती ...

सावन बरसे तरसे दिल...कुछ पुरानी यादों के नशे में - एक बार फिर[पार्ट ७] :)

Wednesday, July 21, 2010
"फिर शाम-ऐ-तन्हाई जागी,फिर याद तुम आ रहे हो...फिर जां निकलने लगी है,फिर मुझको तड़पा रहे हो...इस दिल में यादों के मेले हैं,तुम बिन बहुत...

एक लम्हा

Tuesday, July 20, 2010
जिन्दगी नाम है कुछ लम्हों का.. और उन में भी वही एक लम्हा  जिसमे दो बोलती आँखें चाय की प्याली से जब उठे तो दिल में डूबें डूब के दिल में ...

ऑफिस का एक दिन - CRYING BABY ALWAYS GETS THE MILK FIRST :P

Friday, July 16, 2010
ऑफिस में कभी कभी झटके तो मिलते ही रहते हैं सब को..कभी जोर के झटके तो कभी हलके झटके...ऐसा ही कुछ हुआ हमारे साथ आज सुबह..जोर का झटका था जो की ...

छत की बातें

Tuesday, July 13, 2010
मैं सबसे ज्यादा बैंगलोर में जो मिस करता हूँ वो है घर की छत पर बीती शाम.अब बैंगलोर में जहाँ मैं रहता हूँ उधर वैसी कोई जगह है नहीं जहाँ छत का ...

पुरसुकून समंदर और दायरा

Friday, July 09, 2010
कैफी आज़मी की ग़ज़लें - पार्ट १ पुरसुकून*  समंदर ऐ थके हारे समंदर तू मचलता क्यों नहीं तू उछलता क्यों नहीं . साहिलों को तोड़ के बाहर न...
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