Sunday, May 9, 2010

मातृ दिवस(मदर्स डे) पे सब को बधाई..


मातृ दिवस तो पुरे विश्व में अलग अलग दिनों पे मनाया जाता है.इस दिन की सबसे अच्छी बात ये है की ये हमारी माँ के लिए समर्पित एक दिन है.वैसे तो हम अपनी माँ से सबसे ज्यादा प्यार करते हैं,लेकीन शायद ही कभी हम उन्हें ये जताते हैं की हम उनसे कितना प्यार करते हैं.हमारे तरफ ये रिवाज़ नहीं की हर एक छोटी बात पे "आई लव यू मॉम" कहें. ये थोड़ी आधुनिक सभ्यता की सोच है, लेकीन अच्छी बात है. हमारे तरफ तो बस आँखें और कुछ अहसास ही इस बात का इजहार कर देते हैं.. और माँ ये समझ जाती है की हम उनसे कितना प्यार करते हैं.पूरी दुनिया में किसी से भी पूछो तो एक ही बात कहेगा की "मेरी माँ के हाथ से बना खाना मुझे सबसे ज्यादा पसंद है", मेरी भी यही कहानी है. ऐसा सिर्फ इसलिए की हम सबसे ज्यादा अहमियत अपनी माँ को देते हैं.

ना जाने कितनी बातें हमने सीखी हैं अपनी माँ से...बचपन में जब हम छोटे थे, और हमारा न कोई दोस्त न कोई साथी था तब माँ ही हमारी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी.हमारे साथ खेलना,पढ़ना..हमें चलना सीखाना..हमें अपने हाथों से खाना खिलाना, रात-रात भर जग के हमारे लिए लोरी गाना. हर बात पे डांटना, हर बात पे प्यार झलकाना.ऊँगली थाम के हमें बाहर ले जाना, ये बतलाना की देखो बेटा, ये रास्ता सही है और ये गलत. पास बिठा के अच्छी अच्छी और सच्ची बातें सीखाना.ये सीखाना की बेटा, ये काम कर के तुम अच्छे आदमी बनोगे, ये काम करोगे तो लोग तुम्हें बुरा कहेंगे.सच और झूठ, सही- गलत में फर्क सीखलाना.ये बतलाना की पैसे का इज्जत के आगे कोई मोल नहीं.. ऐसी ही न जाने कितनी ऐसी बातें हैं जो किसी स्कूल, किसी कॉलेज में सिखलाया नहीं जाता, ये बातें जो की बहुत ही अनमोल हैं, हमें अपनी माँ से ही सीखने को मिलती है.

जब हम छोटे थे और जब हमें तकलीफ होती थी, तो हमारे दर्द को बस हमारी माँ ही महसूस कर पाती थी...हमें दर्द में देख उसके आँखों से ऐसे ही बेवजह कभी थोड़े आंसू भी निकाल जाते..आज कितना अफ़सोस होता है ये जान के की कुछ नए प्रवित्ति के लोग ऐसे भी हैं जो ये अक्सर अपनी माँ को कह देते हैं की "आप नहीं समझेंगी", जब हम छोटे थे और हम जब बोल भी नहीं सकते थे तो सारी बातें माँ खुद ब खुद समझ लेती थी, और आज हम कभी ये भी कह देते हैं की "आप नहीं समझेंगी". ये बातें तो किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं है.
अब जब हम बड़े हो गए हैं, अपनी दुनिया हमने खुद बना ली है, और उस दुनिया में न जाने कितने लोग हैं..हममे से कुछ लोग ये भुल जाते हैं की हमारे लिए तो पूरी हमारी दुनिया ही दोस्त है, पूरी हमारी दुनिया ही अपनी है लेकीन हमारी माँ के लिए तो बस हम ही उनकी पूरी दुनिया हैं. 

ये एक बेहद ही खूबसूरत रिश्ता है, शायद इससे खूबसूरत रिश्ता भगवान ने हमें दिया ही नहीं.हमें बस इस रिश्ते के उस खुशनुमा अहसास को बनाये रखने की जरूरत है.आज जब हम बड़े हो गए हैं, फिर भी हमें हर कदम कदम पे अपनी माँ की जरूरत है.माँ आज भी हमारी छोटी से छोटी बातों पे परेशान हो जाया करती हैं, उन्हें आज भी हमारी उतनी ही फ़िक्र रहती है, और ये फ़िक्र, ये प्यार, ये दुलार समय के साथ बढ़ता ही जाता है.तो चलिए हम भी कुछ उनके इस प्यार का मान रखें और उन्हें वो सारी खुशियाँ दें जिनकी सिर्फ और सिर्फ वही हकदार है.

"हमारी जिंदगी में माँ की उतनी ही अहमियत है जितनी साँसों की अहमियत है"

और भी बहुत कुछ लिखना चाह रहा था लेकीन सच मानिए वो सब लिखने को शब्द नहीं मिल पा रहें. 

मैं और मेरी माँ इस तस्वीर में....इस साल होली की तस्वीर है ये


ये कविता सब कुछ बयां करती हैं.....(पूरी कविता मेरे पास नहीं थी, इसलिए कुछ पंक्तियाँ इसमें नहीं है..और कवी कौन है ये भी मुझे नहीं पता..)

इस एक शब्द 'माँ' में है मंत्र–शक्ति भारी
यह मंत्र–शक्ति सबको फलदायी होती है,
आशीष–सुधा माँ देती अपने बच्चों को
वह स्वयं झेलती दुःख, विषपायी होती है।


माँ से कोमल है शब्द–कोश में शब्द नहीं
माँ की ममता से बड़ी न कोई ममता है,
उपमान और उपमाएँ सबकी मिल सकतीं
लेकिन दुनिया में माँ की कहीं न समता है।


माँ की महानता से, महानता बड़ी नहीं
माँ के तप से, होता कोई तप बड़ा नहीं,
साकार त्याग भी माँ के आगे बौना है
माँ के सम्मुख हो सकता कोई खड़ा नहीं।


हैं त्याग–आग अनुराग मातृ–उर में पलते
वर्षा–निदाघ आँखों में पलते आए हैं,
भावना और कर्त्तव्य रहे ताने–बाने
चरमोत्कर्ष ममता – क्षमता ने पाए हैं।


बेटे के तन का रोयाँ भी दुखता देखे
माता आकुल–व्याकुल हो जाया करती है,
जब पुत्र–दान की माँग धरा–माता करती
इस कठिन कसौटी पर माँ खरी उतरती है।


वह धातु अलग, जिससे माँ निर्मित होती है
उसको कैसा भी ताप नहीं पिघला सकता,
हल्के से हल्का ताप पुत्र – पुत्री को हो
माँ के मन के हिम को वह ताप गला सकता|


दुनिया में जितने भी सागर, सब उथले हैं
माता का उर प्रत्येक सिन्धु से गहरा है,
कोई पर्वत, माँ के मन को क्या छू पाए
माँ के सम्मुख कोई उपमान न ठहरा है|


कोई जगरानी किसी चन्द्रशेखर को जब
निज दूध पिला जीवन के पाठ पढ़ाती है,
वह दूध खून का फव्वारा बन जाता है
वह मौत, मौत को भी झकझोर रुलाती है|


कोई विद्या माँ, भगत सिंह से बेटे को
जब घोल–घोल घुट्टी में क्रान्ति पिलाती है,
तो उसका शैशव बन्दूकें बोने लगता
बरजोर जवानी फाँसी को ललचाती है।


कर्त्तव्य हमारा, हम माताओं को पूजें
आशीष कवच पाकर उनका, निर्भय विचरें,
हम लाज रखें उसकी, जो हमने दूध पिया
माँ और बड़ी माँ का हम ऊँचा नाम करें।


माता माता तो है ही, गुरु भी होती है
माता ही पहले–पहले सबक सिखाती है,
माँ घुट्टी में ही जीवन घोल पिला देती
माँ ही हमको जीवन की राह दिखाती है।


हम जननी की, भारत–जननी की जय बोलें
निज जीवन देकर उनके कर्ज चुकाएँ हम
जो सीख मिली है, उसका पालन करने को
निज शीश कटा दें, उनको नहीं झुकाएँ हम।
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9 comments:

Gourav Agrawal said...

मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

Shikha said...

kavita bahut hi achi hai :) :)

likha bhi achhe se hain tmne :)

aur aunty is looking too gud :)


HAPPIEE MOTHERS DAY :)

Mithilesh dubey said...

मातृ दिवस की बहुत-बहुत बधाई आपको ।

आदेश कुमार पंकज said...

बहुत सुंदर
मातृ दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें और मेरी ओर से देश की सभी माताओं को सादर प्रणाम |

अजय कुमार said...

समस्त माताओं को सादर नमन

kshama said...

Har mamatamayi ko aaj kya,zindagi bhar naman!

—÷[¤•(Ąภเl)•¤]÷— said...

Rula hi diya bro :(
kuch zada hi heart touching laga :)

Most touching lines ki maa k liye hum hi unki poori zindagi hai :) :)

God bless to ol momzzz....

Mom u rock \\nn//

Thnxx mom coz juss coz of u .. m breathing rite nw :) :) muaahhhzz :-*

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

हमारे लिए तो पूरी हमारी दुनिया ही दोस्त है, पूरी हमारी दुनिया ही अपनी है लेकीन हमारी माँ के लिए तो बस हम ही उनकी पूरी दुनिया हैं.

वाह, दोस्त क्या बात कही है... बहुत ही प्यारी बात..

Vishal Kumar Kushwaha said...

Luv u mom

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आप सब का तहे दिल से शुक्रिया मेरे ब्लॉग पे आने के लिए और टिप्पणियां देने के लिए..कृपया जो कमी है मेरे इस ब्लॉग में मुझे बताएं..आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा...टिप्पणी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..शुक्रिया

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