कुछ बातें दिल से.... बाद में फ़िर विष्तार से बातें होंगी...

Friday, November 20, 2009
तबियत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में ... हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं .... सोच में पर गया हूँ मैं की ये ग़ज़ल में ऐसी क...

हम किसको परिचित कह पाते

Thursday, November 19, 2009
हम अधरों पर छंद गीत के गज़लों के अशआर लिये हैं स्वर न तुम्हारा मिला, इन्हें हम गाते भी तो कैसे गाते अक्षर की कलियां चुन चुन कर पिरो रखी ...
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